शिखिनां च शुकानां च पिकानां च रुतान्यसौ।
विकुर्वाणोनुकुर्वाणस्तत्तद् भ्रमकरोभवत्।।
मोर, तोता और कोयल इनके आवाज की तरह आवाज का अनुकरण करने से ऐसा प्रतीत होता था कि साक्षात् वह पक्षी ही आवाज कर रहा हो।
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