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शिवभारतम् • अध्याय 7 • श्लोक 20
अनादृत्यपितुस्तांस्तान् द्विपान्दृप्तांस्तथाहयान्। प्रभुर्मतुममन्तुञ्च बह्नमंस्त स मृन्मयान् ।।
पिता के मदमस्त हाथी एवं घोड़ों को पसंद नापसंद करने में वह स्वयं स्वामी होने के कारण उनका अनादर करके वह मिट्टी के हाथी एवं घोड़ों को पसंद करता था।
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