स धात्री करतालीभिः संवर्धितकुतूहलः ।
कुरुते स्म स्मेरमुखो लास्थलीलामनेकधा ।।
दाइयों की तालियों से कुतूहल को प्राप्त हुआ वह प्रसन्नवदन बालक अनेक प्रकार से नृत्य करने लगा।
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