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शिवभारतम् • अध्याय 7 • श्लोक 16
ललन्तं निलयद्वारि द्विरदस्येव शावकम्। विनेतुमागताधात्री विलोक्य स्तिमिताभवत्।।
अपने हाथों से धूल को उड़ाकर घर के दरवाजे के आगे खेलते हुए बालक को अनुशासित करने आई हुई धाइयां, उसको देखकर स्तब्ध हो गई।
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