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शिवभारतम् • अध्याय 7 • श्लोक 15
स्वहस्तपुष्करोद्धृत धूळिधूसरमस्तकम्। उद्भिद्यमानन्दताग्र कुंदकुड्मळ भूषितम्।।
जिनको अभी नवीन दांत निकल रहें हैं ऐसे हाथी के बच्चों का मस्तक अपने शुंड से उड़ाई हुई धूल से जैसे धूसरित हो जाता है वैसे ही कुंद की कलियों जैसे शोभायमान नवीन दांत जिसके अभी निकल रहें हैं और
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