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शिवभारतम् • अध्याय 7 • श्लोक 10
अपिबन्यत्प्रसादेन सुधां सर्वे सुधान्धसः। अहो सोपि मुदं प्रापदास्वाद्य मृदुलां मृदम् ।।
अहो! जिसकी कृपा से सभी देवों ने अमृत पान किया, ऐसा वह स्वयं कोमल मिट्टी खा करके आनंदित हो तो इसमें क्या आश्चर्य है?
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