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शिवभारतम् • अध्याय 6 • श्लोक 92
दर्याखानं शरैर्भित्वा नीत्वा निरवलेपताम्। विजयी शहराजोऽपि शिवंगिरिमथान्व्रजत्।।
उसके बाद दर्याखान को अपने बाणों से विदीर्ण करके और उसके घमण्ड का हरण करके विजयी शहाजीराजे भी शिवनेरी आ गये।
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