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शिवभारतम् • अध्याय 6 • श्लोक 90
अन्तर्बहिश्वरोप्येष बहिर्विहितनिष्क्रमः । व्यधादसूर्य पश्यायाः शिशुः सूर्यस्य दर्शनम्।।
राजपत्नी का वह बालक, अंदर और बाहर सर्वत्र विचरण कर्ता एवं सर्वव्यापी होने के बाद भी उसको बाहर ले जाकर सूर्य के दर्शन करवाये।
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