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शिवभारतम् • अध्याय 6 • श्लोक 84
गुरुत्मद्रत्नसंपृक्तसाग्रवयाघ्नखश्रिया। विन्यस्तयाभ्राजमानं कृष्णकाचमणिस्रजा।।
भारी रत्नों से जड़ित नुकीले बाघ के नखों की आकृति को जिसमें पिरोया गया है ऐसी काली काचमणि की माला गले में पहनने से वह शोभित हो रहा था,
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