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शिवभारतम् • अध्याय 6 • श्लोक 83
अनर्घ्यहीरकिम्मीरपद्मरागमरीचिभिः। संभृतश्रीभरोदग्रे बिभ्राणं भुजभूषणे।।
अमूल्य हीरे एवं विचित्र पद्मराग के किरणों की विलक्षण चमक से युक्त आभूषण बाहु में धारण किए हुए थे,
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