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शिवभारतम् • अध्याय 6 • श्लोक 5
पुण्डरीकायतदृशं सुनसं शुभलक्षणम्। प्रतिप्रतीकलावण्यलीलानिलयमद्भुतम्।। समाविष्टं कमलया शोभितं वनमालया। सर्वदेवमयं देवं सर्वाभरणभूषितम्।।
आंखे कमल जैसी आरक्त एवं बड़ी थी, सुंदर नाक और यह शुभ लक्षणों से संपन्न था, उसका प्रत्येक अवयव सुंदरता का लीलास्थान था, गले में वनमाला से सुशोभित लक्ष्मी उसके समीपस्थ थी,
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