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शिवभारतम् • अध्याय 6 • श्लोक 4
विलसद्रलमुकुटं स्फुरन्मकरकुण्ठलम्। मन्दस्मितोल्लसदृण्ड प्रसन्नमुखमण्डलम्।।
सिर पर रत्नों से जड़ित मुकुट था, कानों में मकर की कुंडलें चमक रही थी, गालों पर मंद मुस्कान भी, मुख मण्डल पर प्रसन्नता थी,
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