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शिवभारतम् • अध्याय 6 • श्लोक 33
शनैः शनैस्तथा वाता वाताः सुरभिशीतलाः। हुतं हविरुपादत्त प्रसन्नश्च हुताशनः ।।
सुगंधित एवं शीतल वायु बहने लगी और आग प्रसन्न होकर आहुत हवि को स्वीकार करने लगी।
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