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शिवभारतम् • अध्याय 6 • श्लोक 31
तदा मुदा मानुषाणां सुराणां च सहस्रशः। समं दुन्दुभयस्तस्य नादेन नदतोऽभवन्।।
तब देवों एवं मनुष्यों की प्रसन्नता के कारण से उनके हजारों नगाड़ो की आवाज एक साथ बजने लगीं,
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