चित्तानुसारिभिर्नित्यमत्यर्थं हितकारिभिः।
जनैः सहचरीणां च लब्धवर्णैर्निषेविते ।।
प्रतिदिन स्वेच्छा से व्यवहार करने वाली एवं अतिशय ध्यान रखने वाली प्रसिद्ध सखियों द्वारा वह सेवित थी।
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