कवींद्र उवाच-
अथो विवक्षुस्तत्कुक्षिं स्वयं योगेखरो हरिः।
शाहपत्न्यै प्रसन्नात्मा स्वमात्मानमदर्शयत्।।
कवींद्र बोलें - शहाजीराजे की पत्नी जीजाबाई के गर्भ से उत्पन्न होने के इच्छुक योगेश्वर विष्णु ने प्रसन्न होकर अपने दर्शन दिए।
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