विधे विधेहि मा चिन्तामवधेहि बचो मम।
भवतोऽभिमतं तावदचिरेण भविष्यति ।।
विष्णु बोले, हे ब्रह्मदेव तुम चिंता मत करो, मेरा कहना मानो, तुम्हारी अभीष्ट वस्तु शीघ्र ही पूर्ण होगी।
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