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शिवभारतम् • अध्याय 5 • श्लोक 47
पितामहस्तामालोक्य विहस्तामस्थिरां स्थिराम्। एवमाश्वासयामास विश्वविश्वासवासभूः ॥
जो विश्व के विश्वास के निवासस्थान है ऐसे ब्रह्मदेव ने उस विश्वभरा को व्याकुल एवं अस्थिर देखकर इस तरह आश्वासन दिया।
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