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शिवभारतम् • अध्याय 5 • श्लोक 43
सज्जना यान्ति विलयं व्रजन्ति क्षत्रियाः क्षयम्। प्रादुर्भूतमिदानीं मे यवनेभ्यो महद्भयम् ।।
साधुओं का नाश हो रहा है, क्षत्रिय समाज नष्ट हो रहा है, इस प्रकार मुझे यवनों से अत्यधिक भय उत्पन्न हो गया है।
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