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शिवभारतम् • अध्याय 5 • श्लोक 41
न सत्राणि प्रवर्तन्ते तथैव च मखक्रियाः। न दानानि विधीयन्ते बिहीयन्ते व्रतानि च।।
उसी तरह यज्ञ की क्रिया तथा सत्रयज्ञ भी नहीं चलतें है, दान और व्रत सभी बन्द हो गये है,
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