त्वं पिता सर्वलोकस्य त्रयीधर्मस्थितिप्रियः।
लोकेश मां तमोऽभोधी मज्जन्तीं किमुपेक्षसे।।
हे ब्रह्मदेवा तुम ही तीनों लोकों के पिता हो एवं वैदिक धर्म की रक्षा करना तुम्हें प्रिय होते हुए भी, मैं इस दुःख सागर में डूब रहीं हूं, फिर भी तुम मेरी उपेक्षा क्यों कर रहे हो?
पूरा ग्रंथ पढ़ें
शिवभारतम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
शिवभारतम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।