निवेदयित्री निर्वेदवती खेदमनेकधा।
मा निबद्धाञ्जलिपुटा प्रोवाच परमेष्ठिनम्।।
दुखियारी विश्वभरा देवी हाथ जोड़कर अपने अनेक प्रकार के दुःखों को निवेदित करने के लिए ब्रह्मदेव से बोली।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
शिवभारतम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
शिवभारतम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।