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शिवभारतम् • अध्याय 5 • श्लोक 33
परितापेन महता मलिना नलिनासनम्। सा ववन्दे त्रयत्रिंशत्कोटित्रिदशवन्दितम्।।
भयानक पीड़ा से तेज हीन हुई उस विश्वंभरा देवी ने, जिनकी वंदना तैंतीस कोटि देवता करते हैं ऐसे उस ब्रह्मदेव को वंदना की।
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