ततो विश्वम्भरा देवी म्लेच्छभारभरार्दिता।
प्रत्यपद्यत लोकेशं शरण्यं शरणैषिणी।।
तब म्लेच्छों की पीड़ा से पीड़िता विश्वंभरा देवी अपनी रक्षा के लिए रक्षणकर्ता ब्रह्मदेव के पास गई।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
शिवभारतम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
शिवभारतम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।