सा भृशं विभ्रमवती प्रसादाभिमुखी सती।
देवी सफलयामास पत्युस्तत्तदभीप्सितम् ।।
वह अत्यंत विलासिनी एवं प्रसन्नवदना साध्वी रानी अपने पति की हर इच्छा को पूर्ण करती थी।
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