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शिवभारतम् • अध्याय 5 • श्लोक 12
साहाय्यार्थं समानाय्य महाभृत्यैर्महामतिः। स्पर्धी निजामशाहस्य स्वं दुर्धर्षममन्यत ।।
अपने प्रमुखों द्वारा, महाबलशाली, अति उत्साहीत एवं उदारमना उस शहाजीराजे को सहायतार्थ बुलाकर, वह (आदिलशाह) अपने आपको अजेय मानने लगा।
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