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शिवभारतम् • अध्याय 5 • श्लोक 10
तदा तेन विना तिग्मद्युतिनेव द्यमण्डलम्। अपि प्राज्यं निजामस्य राज्यं तन्नं व्यराजत ॥
जिस प्रकार सूर्य के बिना आकाश सुंदर नहीं लगता है, उसी प्रकार शाहजी के चले जाने पर निजाम का राज्य समृद्ध होने के बावजूद भी शोभायमान प्रतीत नहीं हो रहा था।
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