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शिवभारतम् • अध्याय 4 • श्लोक 57
भ्रामयन् भल्लमभ्रान्तस्तीव्रमप्रतिमानसः। तज्जघान गजानीकं शरीफस्संगरोद्धतः ॥
तब निडर और युद्धप्रिय, शरीफजी ने एकाग्रचित्त होकर अपने तेज भाले के प्रहार से हाथियों की सेना को मार डाला।
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