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शिवभारतम् • अध्याय 4 • श्लोक 55
दृष्ट्वा शाहशरीफाद्यास्सर्वे भृशबळान्वयाः। चक्रिरे विक्रमपराः संप्रहर्तुमुपक्रमम्।।
ऐसे उस विजय में बाधक बनकर आये हुए मनचेहर को देखकर शहाजी और शरीफजी आदि सभी पराक्रमी योद्धाओं ने उनका संहार करना शुरू किया।
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