हेषाभिरथवाहनां कुंजरणां च गर्जितैः।
सिंहनादेन वीराणा भेरीणां निनदेन च ।।
घोड़ों की हिनहिनाहट, हाथियों की दहाड़, वीरों की सिंह जैसी गर्जना, दुंदुभी की ध्वनि,
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