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शिवभारतम् • अध्याय 4 • श्लोक 36
धावद्धयखुरोद्धतधूलिधूसरमण्डलः। चण्डांशुरन्वभूद् व्योम्नि तदा घनघटावृतिम्।।
दौड़ते पोड़ों के खुरों से उड़ी हुई धूल से सूर्य वृत्त के निस्तेज होने से ऐसा लग रहा था मानो सूर्य आसमान में बादलों से आच्छादित हो गया हो।
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