विद्विषद्धन्दविध्वंसी स्वबाहुबलदर्पितः।
परं न गणयामास निजामो ज्वलनोपमः ॥
ऐसी स्थिति में वह दुश्मन समूह का विनाशक, अपने बाहुबलियों के प्रति अभिमानी, आग की तरह प्रखर निजामशाह अपने दुश्मनों को तिनके के समान समझने लगा।
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