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शिवभारतम् • अध्याय 32 • श्लोक 9
प्रतिफुल्लशिरीषपाटलीपटसौरभ्यभृता नभस्वता। स्मरतापमवीभरन्मनः सुधियां निर्विषयात्मनामपि।।
पुष्पित शिरीष एवं पारूल के गुच्छों की सुगंध से सुगंधित वायु का संयोग विरक्त एवं विद्वान् लोगों के मनों को भी कामज्वर बाधित करने लगा।
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