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शिवभारतम् • अध्याय 32 • श्लोक 8
प्रतिवासरकल्पिताम्भसः सरसीः पङ्कनिषण्णसारसाः । विरमज्झषकच्छपावलीर्विदधे तीव्रतरातपस्तपः ।।
अत्यधिक तीक्ष्ण धूप से युक्त ग्रीष्म ऋतु से प्रत्येक दिन तालाब के पानी के सूख जाने पर सारसपक्षी कीचड़ में बैठने लगे और मछलियां एवं कछुएं मरने लगे।
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