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शिवभारतम् • अध्याय 32 • श्लोक 7
तपतातितरां तपागमे तपनेनाशु कदुष्णतां गताः । सरितस्ततसत्त्वसंश्रयं दधुरन्तः सलिले सुशीतलम्।।
ग्रीष्म ऋतु के आने पर अत्यधिक तप्त सूर्य से किंचित उष्ण हुए पानी के नीचे नदी में शीतल पानी होता है। वहां पशु आश्रय लेते है।
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