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शिवभारतम् • अध्याय 32 • श्लोक 6
श्रितकेसरकाण्डपाटलीसुमनोदम्भनिषङ्गवाहिना। अपि विष्टपजित्वरेषुणा तनुनाहारि शिवस्य नो मनः ।।
आश्रय में स्थित केसर के कांड एवं पारूल के फूल के आधर को धारने करने वाले जिसके बाण है ऐसे कोमल कामदेव ने भी शिवाजी के मन को हरण नहीं किया।
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