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शिवभारतम् • अध्याय 32 • श्लोक 4
अथ तस्य पुरस्य रक्षणे क्षणमालक्ष्य सदेशवर्तिनम्। स गिरि प्रथितं प्रतीत इत्यभिधानेन समन्वितं व्यधात्।।
फिर उस नगर की रक्षा के लिए समीप में स्थित विख्यात एवं विशाल किले को क्षणभर देखकर उसने उसका नाम 'प्रतीतगढ़' रख दिया।
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