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शिवभारतम् • अध्याय 32 • श्लोक 3
हृतराजपुरश्रियं रुषा जितश्रृङ्‌ङ्गारपुरं तथौजसा । परसैनिकपुङ्गवाः शतं शतमेतं शरणैषिणोऽनमन् ।।
क्रोध से राजपुर की संपत्ति को हरण करने वाले एवं शक्ति से शृंगार पुर को जीतने वाले उस शिवाजी को शत्रु पक्ष के सैकड़ों शरणेच्छुक श्रेष्ठ सैनिक प्रणाम करने लगे।
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