मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
शिवभारतम् • अध्याय 31 • श्लोक 7
शिवराज उवाच - वनद्विप इवोन्मतो मत्तो भीतः पलायितः। यः प्राप्तस्त्वां महाबाहो महाबाहुर्नराधिपः ।। तस्य पल्लीवनपतेर्विमतेर्विहितागसः । उपवर्तनमाहतुमुद्यतोऽस्म्यहमंजसा।।
शिवाजी बोला - हे महाबाहो! वन के हाथी के समान उन्मत्त जो बलवान राजा मेरे से भयभीत होकर तेरे पास आया है उस दुष्ट बुद्धि वाले अपराधी पाली राजा के प्रांत को मैं अधिकृत करने के लिए सजग हो गया हूं।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
शिवभारतम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

शिवभारतम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें