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शिवभारतम् • अध्याय 31 • श्लोक 5
वैवधिक उवाच - यदा यदा येदिलस्य साहाय्यं समुपेयुषा। भवता शिवभूपस्य बहवो मन्तवः कृताः ।। यच्च सैन्ये शिवस्योच्चैः संगमेश्वरवर्तिनि । न्यपतः सैन्यसहितो वीतभीर्निशि सम्प्रति ।। प्रभावलीपते विश्वजयिना शाहसूनुना। कथं कथय सोढव्यः स तवापनयो महान्।।
दूत बोला - आदिलशाह की सहायता करके तूने शिवाजी राजा के साथ बहुत अपराध किए और संगमेश्वर में स्थित शिवाजी की सेना पर रात में तूने सेना के साथ बड़ी निर्भयता से आक्रमण किए वह तेरे महान् अपराध है, ये प्रभावली के राजा विश्वविजेता शिवाजी द्वारा कैसे सहन किये जाए।
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