मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
शिवभारतम् • अध्याय 31 • श्लोक 40
अथ कतिपयसैनिकानुयातं प्रतिनुपमाशु दिगन्तमेव यातम्। त्रिभुवनजनजित्वरप्रतापः स बत निहन्तुमपत्रपामवापत्।। इत्यनुपुराणे सूर्यवंशे कवीन्द्रपरमानन्दप्रकाशितायां शतसाहश्यां संहितायां स्वपुरप्रवेशो नाम एकत्रिंशो अध्यायः ।।
तत्पश्चात् कुछ सैनिकों के साथ शीघ्र दिशाओं में पलायन किए हुए शत्रुओं को मारने में 'जिसका प्रताप त्रिभुवन के लोकों जीतने में समर्थ है' ऐसा शिवाजी लज्जित हुआ।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
शिवभारतम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

शिवभारतम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें