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शिवभारतम् • अध्याय 31 • श्लोक 39
आदाय तस्मादभयं द्रढीयः समीयुषा पौरजनेन भूयः। प्रविश्य श्रृंगारपुरं प्रभूय प्रभूतश्रृंगारपदं व्यधायि ।।
उसके पास से सुदृढ़ अभयदान लेकर इकट्ठे हुए पौर लोगों ने शृंगार में पुनः प्रवेश करके तथा समर्थ होकर उसको अनेक अलंकृत पद दियें।
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