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शिवभारतम् • अध्याय 31 • श्लोक 36
अथ प्रसन्नाभयदायकेन दुर्दान्तदर्पापहसायकेन। उपेत्य श्रृंगारपुरे शिवेन भुजस्मयावेशभूता व्यलोकि॥
शरणागतों को अभय देने वाले, अभिमानियों के अभिमान को नष्ट करने वाले, महान बाहुबल के अभिमान को धारण करने वाले उस शिवाजी ने सिंगारपुर के समीप आकर उसको देखा।
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