जो सैकड़ों उन्नत एवं विस्तृत घोड़ियों के समूह से युक्त था, वृक्षों के कोटरों के गर्भ में बैठे हुए उल्लू दुत्कार कर रहे थे, जो बड़े-बड़े नागो द्वारा परित्यक्त अनेक केंचुलियो से चमक रही थी, जहां के वृक्षों की शाखाओं ने आकाश व्याप्त कर दिया था, जो तट पर नाचने वाले अनेक मोरों से मनोहर दिख रही थी, जिसके घोसलों से तोते उड़ रहे थे, जहां कुछ (पक्षी) आवाज कर रहे थे, जिसने किलो के तटों को घेर लिया, जो मेघ की तरह दिख रही थी, जिसके वृक्षों के पल्लव प्रतिक्षण कुंदन करने वाले बंदरों से हिल रहे थे, जहां सुअर घर घर की आवाज कर रहे थे, जिसमें लोमड़ी एवं मदमस्त हाथी की तरह नीलगाय थी, जिसकी घनी झाड़ियों में बड़े-बड़े सिंह छिपे थे, जिसमें अनेक निर्भय भालु वल्मीक खोज रहे थे, जो भयंकर होती हुई भी ऊंचे ऊंचे झोपड़ियों से सुशोभित थी, ऐसे उस सिंगारपुर की झाड़ियों में प्रवेश करने वाला विविध प्रकार से आक्रमण करने का इच्छुक वह शिवाजी, सूर्यराज भाग गया ऐसा सुनकर सेना सहित खिन्न हो गया।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
शिवभारतम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
शिवभारतम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।