अमुना हेतुना नूनं दुर्मनाः स द्विजोत्तमाः। प्रभावलीपरिवृढो न मृधे निदधे मनः ।।
इस कारण से वास्तव में दुखी होकर ही अरे पंडितों! उस प्रभावली के राजा ने युद्ध करने की इच्छा व्यक्त नहीं की।
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