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शिवभारतम् • अध्याय 31 • श्लोक 22
दृढव्रतः शिवोऽमुष्मै भूयो भूयः कृतागसे। अपि निग्रहणीयाय निग्रहं न व्यचिंतयत् ।।
उसके बारंबार अपराध करने पर भी एवं वह निग्रह करने में समर्थ होने पर भी दृढ़ व्रती शिवाजी ने उसके निग्रह करने का विचार मन में कैसे नहीं लाया?
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