मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
शिवभारतम् • अध्याय 31 • श्लोक 2
तं भूरिणा प्रभावेण परिभूतारिसैनिकम्। वंदमानं नृपः पश्यन् अभिमानधनं तदा।। उपकण्ठे नीलकण्ठराजात्मजनिवेदितम्। प्रथीयसा प्रसादेन सानीकं समभावयत् ।।
जिसने बड़े पराक्रम से शत्रु की सेना को पराजित किया वह तानाजी आ गया, यह नीलकण्ठ राजा के पुत्र ने समीप जाकर बताया तो वंदन करने वाले उस अभिमानधनी तानाजी को देखकर राजा ने उसका सेना के साथ बड़े आदर से सत्कार किया।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
शिवभारतम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

शिवभारतम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें