कविंद्र बोला - जयवल्ली के विजय के पराक्रम से विख्यात हुए इंद्र की तरह पराक्रमी शिवाजी को पहले मान्य करके सूर्यराज ने प्रभावली का समृद्ध राज्य स्वयं पालन करने की इच्छा से तेरा मैं कृतपुत्र हूं ऐसा संदेश भेजकर निवेदन किया था।
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