तब उस देश की रक्षा के लिए अत्यंत समर्थ चित्रदुर्ग इस नाम से विख्यात निपुण गढ़ को देखकर उस उत्साही शिवाजी ने उसके मस्तक पर निपुण कारीगरों के द्वारा चारों और ऊंचा तट बनवाया।
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