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शिवभारतम् • अध्याय 31 • श्लोक 12
ततस्तं देशमाक्रम्य शिवः पल्लीवनाह्वयम्। अन्वग्रहीदनुग्राह्यान् निगृह्यान् न्यग्रहीदपि।।
तत्पश्चात शिवाजी ने पाली नामक उस प्रांत को अधीन करके दया करने योग्यों पर दया एवं निग्रह करने योग्यों पर निग्रह किया।
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